First Posted online on July 14th 2014

सुकून मिलता है माँ के आँचल में नन्ही को टुकुर-टुकुर देखकर सोने में

सुकून पाते हैं पिता की राह देखते वक़्त, उनके स्कूटर के रुकने की आवाज़ से

सुकून आता है, दूर शहर में बेटी का देर रात, काम से सुरक्षित घर लौटने पर

सुकून बरसता है बेटी की विदाई पर, आँसुओं के साथ निकलते आशीर्वाद में

सुकून में सराबोर हैं सब, लंबे समय बाद अपनों के चेहरों को देखकर

सुकून है… उलझन-रहित ठहरा मन… शून्य पराकाष्ठा के क्षण

सुकून देता है किसी भी समस्या, परेशानी को सामना करने का बल

सुकून है एक भूटानी अनुभव

सुकून आता है माँ, पिता के 120 / 80 ब्लड-प्रेशर से

सुकून देता है खुला मस्तिष्क, दिलेर दिल और अच्छे लगते लोग

सुकून है शायद जीवन के अंतिम क्षणों में मन की अंजानी स्थिति में

सुकून कहता है रहो मौन और रचो शब्द-रहित कविता

सुकून पाया है आंतरिक कोमल पलों के समाधि मंत्र से

सुकून मिलेगा जीवन के अंतिम क्षणों में, उसके हाथों को अपने हाथ में लेकर

सुकून पाया है हमने इस बार

सुकून कहा है हमने उसको

— विवेक शुक्ल